हिंदी गीत माला. आप मानें या न मानें पर ये ऐसे गीत हैं जो लिखे नहीं गए वल्कि लिख गए. बदली बन कर आए और बरस गए और वो सब कुछ कह गए जो हर कोई कहना चाहता है पर कह नहीं पाता. बस.
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Saturday, 24 January 2015
Tuesday, 18 June 2013
उठो राही, चलें, अब कोई न भय है. NOW IS THE TIME
उठो राही
दूरिओं की बात थी कुछ,
मौन निष्ठुर रात थी कुछ
वह अँधेरा,
बन सबेरा,
आज लेकर आ गया रवि का उदय है.
उठो राही, चलें, अब
कोई न भय है.
राह हँस कर मौन है जब,
रोक सकता कौन है तब,
सभी सपने
बने अपने,
सुरभि संकुल पवन भी अब त्वरण मय है.
उठो राही, चलें, अब कोई न भय है.
भावना का यह उभरना-
झर रहा बन किरण झरना,
और रुक-रुक
झूम झुक-झुक
बिहारती फिरती फ़िजाएँ भर प्रणय हैं.
उठो राही, चलें, अब
कोई न भय है.
रोशनी से तर प्रभाती-
स्वागतम के गीत गाती,
और मंजिल,
खोल कर दिल,
स्वयं पथ में आ खड़ी होकर सदय है.
उठो राही, चलें, अब कोई न भय है.
अब हमें करनी न देरी,
राह जोती राह मेरी,
हर विजय का-
फूल महका,
सुरभि से सन, लोटती पथ पर मलय है.
उठो राही, चलें, अब
कोई न भय है.
यदुराज सिंह बैस
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