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Saturday, 29 June 2013

मच्छर (थप्पड़ पड़ा मर गया. बिना कष्ट तर गया.)

मच्छर


गाल पर आ बैठा

खून पीने के लिए,
रही होगी चाहत-
और जीने के लिए.
थप्पड़ पड़ा मर गया.
बिना कष्ट तर गया.

उसे-
न रोगों ने जकड़ा,
न खटिया ने पकड़ा,
न हाथ-पाँव रगड़े,
न घाव हुए तगड़े,
न खांसी, न खों खों,
न कोई लबड़घोंघों,
न दिल ने दिया झटका,
न सिर कहीं पटका,
न दौरे की दहशत,
न मिर्गी मशक्कत,
न लकवे ने मारा,
न लुटा-पिटा-हारा,
न साँसों की गड़बड़,
न प्राणों की भगदड़,
न घिसटा, न रोया,
न आपा ही खोया,
बस, पड़ा एक थप्पड़,
और ख़त्म सब पच्चड़!
प्रश्न है की क्या हुआ?
अच्छा या बुरा हुआ?


यदुराज सिंह बैस